कच्चा हीरा के बारे में भारत ने रुस से लंबी अवधि का करार करने को कहा आनंद शर्मा ने भारत एवं रुस की दवा कंपनियों के बीच संयुक्त उपक्रम पर जोर दिया

आज भारत और रुस के व्यापार मंत्रियों की बैठक में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के पहले इससे जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर वार्ता की शुरूआत हुई। केंद्रीय वाणिज्य उद्योग एवं कपड़ा मंत्री आनंद शर्मा ने रुस के आर्थिक विकास मंत्री का स्वागत किया और व्यापारिक समझौतों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि यह बैठक इसलिए महत्वपूर्ण है कि यह न सिर्फ ब्रिक्स के व्यापार मंत्रियों की बैठक और शिखर सम्मेलन से पहले हो रही है बल्कि आगामी जी- 20 बैठक से भी पहले हो रही है। शर्मा ने कहा कि इस बैठक का इसलिए भी महत्व बढ़ जाता है कि रुस विश्व व्यापार संगठन में शामिल होने के बाद पहली बार ब्रिक्स की बैठक में भाग लेगा।

आम बजट में वि‍कास, नि‍वेश, आपूर्ति‍ की खामि‍यों, शासन और कुपोषण को खत्‍म करने के संबंध में पांच लक्ष्‍यों की पहचान

वि‍त्‍त वि‍धेयक के तहत एफआरबीएन अधि‍नि‍यम में संशोधन पेश केन्‍द्रीय सब्‍सि‍डी को सकल घरेलू उत्‍पाद के दो प्रति‍शत तक रखा जाएगा ,

वित्‍त मंत्री ने कहा – भारत ने वैश्विक और घरेलू चुनौतियों के बावजूद प्रगति की

केन्‍द्रीय वित्‍त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने आज संसद में आम बजट 2012-13 को पेश करते हुए कहा कि भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था ने वैश्विक और घरेलू चुनौतियों के बावजूद प्रगति की है और भविष्‍य में भी वह प्रगति के पथ पर चलती रहेगी। उन्‍होंने कहा कि भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था के लिए यह वर्ष चुनौतियों से भरा रहा। कई वैश्विक और घरेलू कारकों ने आर्थिक विकास को बाधित करने की कोशिश की।

सिरिया : दमिश्क के पास भारी लड़ाई की सूचना

प्रत्यक्षदर्शियों और विपक्ष के कार्यकर्ताओं ने सिरिया की राजधानी दमिश्क में विद्रोहियों और.

बढ़ते हुए वैश्विक परिदृश्य में दूसरे देशों के साथ संबंधों को विस्तार देने के लिए राजकीय यात्राएं बेहद अहम

मीडिया के कुछ वर्गों ने हाल के दिनों में भारत की राष्ट्रपति प्रतिभा देवीसिंह पाटील की विदेशी यात्राओं पर हुए व्यय को रेखांकित किया गया है। इन रिपोर्टों में राष्ट्रपति की यात्राओं की तुलना पूर्व राष्ट्रपतियों की विदेश यात्राओं से भी की गई है

गुरुवार, 5 अप्रैल 2012

पंचवर्षीय योजना के दौरान पर्यटन क्षेत्र में 2.5 करोड़ रोजगार का सृजन होगा: केन्द्रीय पर्यटन मंत्री


राष्ट्रीय आतिथ्य शिक्षा उत्कृष्टता पुरस्कार प्रदान किए गए 



केन्द्रीय पर्यटन मंत्री सुबोधकांत सहाय, वर्ष 2010-11 के लिए राष्ट्रीय आतिथ्य शिक्षा उत्कृष्टता पुरस्कार प्रदान करते हुए साथ में
 पर्यटन राज्‍य मंत्री सुल्‍तान अहमद, पर्यटन मंत्रालय के वरिष्‍ठ अधिकारी भी दिखाई दे रहे हैं- पसूका फोटो

नई दिल्‍ली (पसूका): नई दिल्‍ली (पसूका): केन्द्रीय पर्यटन मंत्री सुबोधकांत सहाय ने आज यहां वर्ष 2010-11 के लिए राष्ट्रीय आतिथ्य शिक्षा उत्कृष्टता पुरस्कार प्रदान करते हुए कहा कि अंतर्गामी और घरेलू पर्यटकों में 12 प्रतिशत विकास लक्ष्य के साथ पर्यटन मंत्रालय ने बारहवीं पंचवर्षीय योजना के दौरान पर्यटन क्षेत्र में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों प्रकार से लगभग 2.5 करोड़ अतिरिक्त रोजगार के सृजन का आकलन किया है। उन्होंने कहा कि आतिथ्य क्षेत्र में प्रत्यक्ष रोजगार की संख्या भी काफी होगी। उन्होंने आगे कहा कि आतिथ्य व्यापार से संबंधित रोजागार की संख्या ही लगभग 36 लाख होगी। मंत्री महोदय ने जानकारी दी कि आतिथ्य उद्योग को हर वर्ष लगभग दो लाख प्रशिक्षित लोगों की ज़रुरत है लेकिन आपूर्ति केवल 18000 लोगो की ही है। जिसमें 30 से 35 प्रतिशत की और कमी होकर यह मात्र 12000 लोगों तक ही सिमट जाती है। सहाय ने कहा कि “ हमारे आकलन के अनुसार ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना के अंत तक सांस्थानिक अवसंरचना और विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों, आईटीआई, पॉलिटेक्निक और विद्यालयों के द्वारा आतिथ्य शिक्षा के दायरे को बढ़ाने के हमारे प्रयासों से प्रमुख रुप से प्रशिक्षित लोगों की आपूर्ति में वृद्धि की संभावना है ।” 

पर्यटन मंत्री ने कहा कि – केन्द्र सरकार अपनी ओर से सरकार प्रायोजित और अधिक आईएचएम और एफसीआई की स्थापना, विश्वविद्यालयों, आईटीआई, महाविद्यालयों, पॉलिटेक्निकों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, विद्यालयों आदि के तत्वाधान में प्रशिक्षण के दायरे के विस्तार, अल्प कालीन आतिथ्य पाठ्यक्रमों की शुरुआत, “हुनर से रोजगार” कार्यक्रम के ज़रिए मौजूदा और आकांक्षी सेवा प्रदाताओं के कौशल में उन्नयन, मौजूदा सेवा प्रदाताओं के कौशल परीक्षण और प्रमाणन के जरिए कुशल कामगरों के अंतर को कम करने के लिए सक्रियता से कोशिश कर रही है। सहाय ने कहा कि- “यह एक महत्वपूर्ण सुधार होगा पर यह काफी नहीं है। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि इस उद्योग में लगभग 5 मिलियन लोग जुडे हुए हैं जिससे काफी राजस्व प्राप्त होता है, इसलिए विश्व स्तरीय आतिथ्य सेवा का निर्माण करने के लिए प्रयास और संसाधन उद्योग के भीतर से ही होना चाहिए।” 

केंद्रीय पर्यटन मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार के प्रयास हालांकि महत्‍वपूर्ण हैं लेकिन उसे आवश्‍यक रूप से सहयोगात्‍मक और उत्‍प्रेरक होना चाहिए। इसमें हमारे आईएचएम तथा एफसीआई को निजी क्षेत्र की तरह प्रोत्‍साहित और प्रेरित प्रयास के तहत स्‍वंय को उत्‍कृष्‍टता के स्‍तर तक ले जाना चाहिए । उन्‍होंने कहा ‘इसलिए मैं आह्वान करता हूं कि आदर्श संस्‍थान बनने के लिए संस्‍थान अपने स्‍तर को बढ़ाने के लिए तत्‍पर प्रयास करे जो कि अंतरराष्‍ट्रीय रूप से स्‍वीकार्य हो। मंत्रालय सदैव आपके लिए सहायक भूमिका में रहेगा। ’ 

अंतरराष्‍ट्रीय और घरेलू पर्यटन में प्रोत्‍साहित रूझानों को देखते हुए सुबोध कांत सहाय ने कहा कि देश की वृद्धि और रोज़गार सृजन में पर्यटन की एक मुख्‍य भूमिका है। उन्‍होंने कहा कि जीडीपी में पर्यटन क्षेत्र के योगदान का अनुमान 9 प्रतिशत से अधिक लगाया गया है। 

उन्‍होंने कहा कि प्रमुख पर्यटन गंतव्‍यों पर अवसंरचना और सेवा आपूर्ति के संदर्भ में मौजूद खामियों की पहचान के लिए मंत्रालय ने स्‍वतंत्र रूप से एक अध्‍ययन किया था। उन्‍होंने कहा कि स्‍मारकों/गंतव्‍यों में और उसके आस-पास स्‍वच्‍छता और सफाई की कमी , स्‍मारकों/गंतव्‍यो के आस-पास ठोस अपशिष्‍ट का खराब प्रबंधन तथा शौचालयों जैसी सार्वजनिक सुविधाओं में सफाई की कमी ऐसे मुख्‍य कारण हैं जो भारत को प्रमुख पर्यटन गंतव्‍यों के रूप में उभारने के हमारे प्रयासें में बाधा डाल रहे थे। सुबोध कांत ने कहा कि ‘स्‍वच्‍छ भारत अभियान ’ का उद्देश्‍य पर्यटन गंतव्‍यों तथा उसके आस-पास के क्षेत्र को साफ और स्‍वच्‍छ बनाना हे। उन्‍होंने कहा कि इसका उद्देश्‍य स्‍वमित्‍व तथा निजी और सार्वजनिक क्षेत्र के हितधारकों को शामिल कर इसे बरकार रखना भी है। सहाय ने कहा कि ‘आईएचएम और एफसीआई द्वारा सभी अन्‍य शिक्षा संस्‍थानों के पालन के लिए स्‍मारकों में और उसके आस-पास स्‍वच्‍छता के मानक स्‍थापित करने में प्रमुख भूमिका निभाने की उम्‍मीद है।’ 

सुबोध कांत ने कहा कि भारत के व्‍यंजनों की अनेक किस्‍मों को संस्‍थागत प्रक्रिया के जरिए संरक्षित, बढ़ावा, अनुसंधान तथा पेटेंट कराने के लिए पर्यटन मंत्रालय देशभर में छह केंद्रों के साथ इंडियन क्‍यूनिलरी इंस्‍टिट्यूट की स्‍थापना के लिए प्रयास कर चुका है। राष्ट्रीय आतिथ्य शिक्षा उत्कृष्टता पुरस्कार (2010-11) तीन श्रेणियों में दिया गया अर्थात छात्रों को पुरस्‍कार, शिक्षण फक्‍ल्‍टी को पुरस्‍कार तथा संस्‍थानों को पुरस्‍कार। 

पहली श्रेणी के पुरस्‍कार विजेताओं में वे छात्र थे जिन्‍होंने 2010-11 में उत्‍कृष्‍ट शैक्षिक प्रदर्शन किया है। कुल मिलाकर 23 छात्रों को यह पुरस्‍कार प्रदान किया गया। प्रत्‍येक विजेता को एक पदक, शैक्षिक उत्‍कृष्‍टता का प्रमाणपत्र तथा नकद इनाम दिया गया। शिक्षकों की श्रेणी में 10 पुरस्‍कार प्रदान किए गए। शिक्षकों को पूर्व-निर्धारित वस्‍तुनिठ मूल्‍यांकन मानक के आधार पर पुरस्‍कार के लिए चयन किया गया था। 

इस समारोह में पर्यटन राज्‍य मंत्री सुल्‍तान अहमद, पर्यटन मंत्रालय के वरिष्‍ठ अधिकारी तथा पर्यटन और आतिथ्‍य उद्योग के गणमान्‍य व्‍यक्ति भी उपस्थित थे1 पुरस्‍कार जीतने वाले छात्रों, शिक्षकों तथा संस्‍थानों की सूची के लिए कृपया अंग्रेज़ी विज्ञप्ति देखें। 

350 लाख क्विंटल से अधिक उन्‍नत बीज का उत्‍पादन



देश में 350 लाख क्विंटल से अधिक उन्‍नत बीज का उत्‍पादन हुआ है। 


नई दिल्‍ली (पसूका): वर्ष 2011-12 में 353.62 लाख क्विंटल प्रमाणित/उन्‍नत बीज उत्‍पादन में से लगभग 51 प्रतिशत का उत्‍पादन सरकारी एजेंसियों द्वारा किया गया, जबकि निजी क्षेत्र की बीज उत्‍पादन कंपनियों ने 49 प्रतिशत का उत्‍पादन किया। 

मोटे अनाजों, तिलहनों और दलहनों जैसी फसलों के लिए बीज उत्‍पादन अधिकांशत: सरकार के स्‍वामित्‍व वाली बीज उत्‍पादन कंपनियां करती हैं, जबकि सब्‍जी, कपास, मक्‍का, धान, सूरजमुखी आदि फसलों के लिए बीज उत्‍पादन के कार्य में निजी क्षेत्र की बीज उत्‍पादन कंपनियों आगे हैं। बी टी कपास और संकर मक्‍का जैसी बीज उत्‍पादन की नयी प्रौद्योगिकियों के आने से इन बीजों की आपूर्ति के संदर्भ में निजी क्षेत्र के बीज उत्‍पादक महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। 

मौजूदा वित्‍त वर्ष (2012-13) में केन्‍द्रीय क्षेत्र की ‘उन्‍नत बीजों के उत्‍पादन और वितरण के लिए आधारभूत सुविधाओं का विकास और सशक्तिकरण’ नामक योजना के अधीन 294 करोड़ रुपये आवंटित किेये गये हैं। 

संयुक्‍त अरब अमीरात और भारत भारतीय अनुबंध कामगारों के नियोजन को सुसंगत बनाने के लिए इलैक्‍ट्रॉनिक प्रणाली शुरू करेंगे

नई दिल्‍ली (पसूका): संयुक्‍त अरब अमीरात के श्रम मंत्रालय और भारत के प्रवासी भारतीय कार्य मंत्रालय के बीच आज अबु धाबी में एक समझौते पर हस्‍ताक्षर किया गया है। इस समझौते का उद्देश्‍य भारतीय अनुबंध कामगारों के प्रवेश को सुसंगत बनाने के लिए इलैक्‍ट्रॉनिक अनुबंध पंजीकरण और वैधता प्रणाली शुरू करना है। संयुक्‍त अरब अमीरात में भारतीय नागरिकों के अनुबंध आधारित नियोजन से संबंधित नियमों को अद्यतन बनाने और प्रक्रियाओं को नियंत्रित करने से संबंधित प्रयास इस दिशा में एक मील का पत्‍थर है, जिसके लिए संयुक्‍त अरब अमीरात और भारत द्वारा एक संयुक्‍त प्रयास की जरूरत है।

संयुक्‍त अरब अमीरात के श्रम मंत्री श्री सक्र घोबास ने भारत के साथ संयुक्‍त अरब अमीरात में भारतीय अनुबंध कामगारों के नियोजन सहित विभिन्‍न क्षेत्रों में भारत के साथ सहयोग के प्रति संयुक्‍त अरब अमीरात की प्रतिबद्धता दोहरायी है। संयुक्‍त अरब अमीरात में भारतीय अनुबंध कामगारों की संख्‍या बढ़कर लगभग 1.7 मिलियन हो गई है।

प्रवासी भारतीय कार्य मंत्री श्री वयालार रवि ने समझौते की सराहना की, जिससे श्रम नियोजन के क्षेत्र में भारत-संयुक्‍त अरब अमीरात संबंधों के बल पर कामगारों के साथ-साथ नियोक्‍ताओं के हितों की भी रक्षा होगी। श्री रवि ने कहा कि इस समझौते में संयुक्‍त अरब अमीरात के विधान के अनुसार संयुक्‍त अरब अमीरात में भारतीय कामगारों के संरक्षण और कल्‍याण के प्रति भारत सरकार की प्रतिबद्धता को रेखा‍किंत किया गया है। संयुक्‍त अरब अमीरात के श्रम मंत्री को धन्‍यवाद देते हुए श्री रवि ने कहा कि नई प्रणाली के माध्‍यम से संयुक्‍त अरब अमीरात में भारतीय कामगारों की अनुबंध शर्तों की वैधता द्वारा कामगारों और नियोक्‍ताओं के हितों की रक्षा होगी।

इस समझौते की उत्‍पत्ति प्रवासी भारतीय कार्य मंत्री श्री वयालार रवि और संयुक्‍त अरब अमीरात के श्रम मंत्री श्री सक्र घोबास द्वारा पिछले वर्ष 13 सितम्‍बर को नई दिल्‍ली में संयुक्‍त अरब अमीरात और भारत के बीच श्रम शक्ति पर आधारित एक व्‍यापक सहमति पत्र पर हस्‍ताक्षर से हुई है।

गुरुवार, 29 मार्च 2012

बढ़ते हुए वैश्विक परिदृश्य में दूसरे देशों के साथ संबंधों को विस्तार देने के लिए राजकीय यात्राएं बेहद अहम


राष्ट्रपति  प्रतिभा देवीसिंह पाटील फोटो © पसूका (फाइल फोटो)
नयी दिल्ली (पसूका): मीडिया के कुछ वर्गों ने हाल के दिनों में भारत की राष्ट्रपति  प्रतिभा देवीसिंह पाटील की विदेशी यात्राओं पर हुए व्यय को रेखांकित किया गया है। इन रिपोर्टों में राष्ट्रपति की यात्राओं की तुलना पूर्व राष्ट्रपतियों की विदेश यात्राओं से भी की गई है।

गतिशील अर्थव्यवस्था, रणनीतिक महत्व, लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था और प्राचीन सभ्यता की कडियों के संदर्भ में भारत के बढ़ते हुए वैश्विक परिदृश्य ने विश्व के देशों के साथ उसके संबंधों को और अधिक बढ़ाया है। इन संबंधों के मद्देनज़र भारत की राष्ट्रपति के लिए द्विपक्षीय सहयोग को और अधिक मजबूत बनाने के लिए विभिन्न देशों की यात्राएं करना आवश्यक है। उदाहरण के लिए लैटिन अमेरिकी देशों में राष्ट्रपति की यात्रा ने इस क्षेत्र से जुड़े महत्व पर बल दिया, जिसमें लगभग पिछले एक दशक से किसी भी राष्ट्रपति ने यात्रा नहीं की थी। अऩ्य यात्राएं विशिष्ट कार्यक्रमों के तहत की गई। बहुत से देशों की यात्राएं इसलिए करनी पडी क्योंकि इंडोनेशिया, साइप्रस, लाओस, कंबोडिया, और मंगोलिया जैसे देश इसके लिए अनुरोध कर रहे थे। कुछ देशों जैसे सीरिया, तजाकिस्तान और स्पेन में किसी भी भारतीय राष्ट्रपति ने पहली बार यात्रा की।

विभिन्न राष्ट्रपतियों द्वारा की गई विदेशी यात्राओं और देशों की यात्राओं की संख्यां के संबंध में आंकड़े संभवतः गुमराह करने वाले हैं क्योंकि इस प्रकार की यात्राओं में किसी मानक पैटर्न का अनुसरण नहीं किया जाता। विदेशों से प्राप्त आमंत्रणों और इसके पश्चात उस यात्रा की आवश्यकता का निर्धारण करने और साथ ही विदेश मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय की संस्तुति के बाद इस प्रकार की यात्राएं की जाती हैं। विभिन्न राष्ट्रपतियों द्वारा की गई विदेशी यात्राओं की संख्या अलग-अलग है। उदाहरण के तौर पर डॉ. कलाम ने 17 देशों, श्री नारायणन ने 13 देशों, श्री वेंकटरमन ने 12 देशों और श्री वी.वी. गिरी ने अपने कार्यकाल के दौरान 22 देशों की यात्राएं की।

विदेशी यात्राओं के दौरान राष्ट्रपति के साथ मंत्रियों, सांसदों और सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के लिए सहायक और सुरक्षा कर्मचारी इस आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल का भाग होते हैं । सभी राष्ट्रपति मीडिया दल के अलावा अपने पारिवारिक सदस्यों और राष्ट्रपति के मेहमानों के साथ यात्रा करते हैं। राष्ट्रपति पाटील की यात्रा के दौरान भी पूर्व की परिपाटी का ही पालन किया गया और इसलिए यह कहना कि राष्ट्रपति पाटील अधिकतर अपने पारिवारिक सदस्यों के साथ यात्राओं पर गईं, यह तथ्यों को गलत तरीके से प्रस्तुत करना होगा।

इसलिए विभिन्न राष्ट्रपतियों द्वारा की गई विदेशी यात्राओं की तुलना करना संभवतः गुमराह करने वाला है। यह यात्राएं विदेश मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा ध्यानपूर्वक मूल्यांकन और संस्तुतियों के बाद की जाती हैं।

बुधवार, 28 मार्च 2012

राष्‍ट्रीय अल्‍पसंख्‍यक आयोग - पांच धार्मिक अल्‍पसंख्‍यक समुदायों के आत्‍मविश्‍वास में वृद्धि




राष्‍ट्रीय अल्‍पसंख्‍यक आयोग की स्‍थापना एक संवैधानिक निकाय के रूप में 1993 में की गई थी। इसका उद्देश्‍य पांच धार्मिक अल्‍पसंख्‍यक समुदायों में आत्‍मविश्‍वास की इस भावना को सुदृढ़ बनाना था कि राज्‍य सरकारें उनके धार्मिक अधिकारों, स्‍वतंत्रता और देश के कानूनों का सम्‍मान करती हैं। यह आयोग संविधान द्वारा दिए गए अधिकारों के कार्य और सुरक्षा का आकलन करने के लिए अध्‍ययन करवाती है। इन शोध कार्यों और अध्‍ययनों से केंद्र और राज्‍य दोनों सरकारों द्वारा अल्‍पसंख्‍यकों के विकास और प्रगति का अनुमान लगाया जाता है।

वर्ष 2011-12 के दौरान राष्‍ट्रीय अल्‍पसंख्‍यक आयोग ने तीन दंगाग्रस्‍त इलाकों का मौके पर जाकर जायजा लिया-

बिहार के अररिया जिले में फारबिसगंज जहां पुलिस द्वारा गोली चलाने से चार मुस्‍लिम मारे गए थे। आयोग ने सिफारिश की कि भीड़ पर गोलीबारी शुरू करने के जिम्मेदार पुलिसकर्मियों पर मुकदमा चलाया जाए और घटना में हताहत हुए लोगों को मुआवजा दिया जाए।

राजस्‍थान में भरतपुर जहां पुलिस और मेव और गुर्जर लोगों में झड़प हुई थी जिसके कारण 10 लोग मारे गए थे। इस आयोग ने अपने दो सदस्‍यों को मौके पर जाकर जांच के लिए भेजा जिसमें श्रीमती सैयदा इमाम और श्री के.एन. दारूवाला शामिल थे। आयोग ने सिफारिश की कि जिला अधिकारियों और खासतौर से पुलिस को इस विषय में संवेदनशील बनाने के उपाय किये जाएं। जिला मजिस्‍ट्रेट, जिला पुलिस प्रमुख और एएसपी को आयोग की सिफारिश पर निलम्बित कर दिया गया।

उत्‍तरकाशी में रूद्रपुर जहां दो ग्रुपों के बीच झड़प के परिणामस्‍वरूप चार लोग मारे गए और आगजनी और लूट में बड़े पैमाने पर सार्वजनिक और निजी सम्‍पति का नुकसान हुआ था। आयोग की श्री के.एन. दारूवाला के नेतृत्‍व में टीम ने मौके पर जाकर प्रभावित परिवारों से भेंट की। इस मामले में जो सिफ़ारिशें की गईं उनमें मोहल्‍ला  शांति समितियों को सक्रिय बनाना, पुलिसकर्मियों को संवेदनशील करना और जिन पुलिस कार्मिकों ने पूर्वाग्रहपूर्ण भूमिका निभाई, उनका तबादला करना शामिल था।

बड़े पैमाने पर मुस्‍लिम युवकों की गिरफ्तारी और उन्‍हें बिना साक्ष्‍य के लम्‍बे समय तक जेलों में बंद रखना आयोग के लिए एक चिंता की बात थी। आयोग इस बात से भी उद्वेलित था कि सालों तक और कभी-कभी दशकों तक मुक़दमे की सुनवाई चलने के बाद पुलिस आरोप साबित नहीं कर पाई। रिहा किये गए युवा पूरी तरह पुनर्वासित नहीं किये गए और कुछ मामलों में तो बरी होने के बाद उन्‍हें सामान्‍य जीवन भी नहीं बिताने दिया और उन्‍हें समाज के प्रति शक की नजर से देखा गया।

इस संदर्भ में आयोग ने राज्यों और केंद्र सरकार से बात की और मुक़दमे की सुनवाई तेजी से पूरा करने और मुक़दमों के अभियोजन पक्ष को स्‍वतंत्र बनाने की जरूरत पर जोर दिया गया ताकि अभियोजन पक्ष पुलिस द्वारा की गई गिरफ्तारयों पर अंगुली उठा सके। आयोग ने आंध्र प्रदेश सरकार के साथ संपर्क किया और उन मुसलमान युवकों के बारे में बात की जिन्‍हें उच्‍च न्‍यायालय ने मक्‍का-मस्जिद विस्‍फोट मामले में बरी कर दिया था। राज्‍य सरकार ने माकूल जवाब दिया और 20 मुस्‍लिम युवकों को, जो अदालत द्वारा बरी कर दिये गए थे, 70 लाख रूपये की सहायता दी।

इस आयोग ने ईसाईयों की जिन समस्‍याओं को सुलझाने के प्रयास किए उनमें ईसाई संगठनों और चर्चों की गिन‍ती के समय ईसाई परिवारों के प्रोफाइल बनाने के भोपाल पुलिस के आदेश, मांडला के खुंभ मेले में पिछले साल ईसाइयों के खिलाफ किया गया दुष्‍प्रचार, और कर्नाटक तथा मध्‍यप्रदेश में र्इसाइयों को परेशान करने की घटनाएं और संविधान द्वारा  गांरटीशुदा उनके अधिकारों - घर में ही प्रार्थना सभाएं करना शामिल हैं। बंगलौर में जिन पुलिसकर्मियों ने एक ब्रदर को सरेआम मुकदमा दायर न करके परेशान किया था, और 3 ईसाई पुजारियों को मध्‍यप्रदेश में एक हिन्‍दू के अंतिम संस्‍कार की घटना के खिलाफ फर्जी मामला दर्ज किया था ये सभी मामले आयोग के हस्‍तक्षेप के बाद सुलझा लिए गए। बंगलौर में पुलिस कर्मी को निलम्बित कर दिया गया और जांच चल रही है। मध्‍यप्रदेश पुलिस द्वारा दर्ज किए गए फर्जी मामले वापस लिए जा चुके है।

      साल के दौरान आयोग ने उन बौद्धों की भावनाएं शांत करने की कोशिश कीं जो करमापा के बारे में मीडिया में खबरें छपने से उतेजित हो गए थे। आयोग ने यह मामला सरकार और ब्रॉडकास्‍ट कौंसिल के साथ उठाया ताकि मीडिया को ऐसे मामलों में संवेदनशील बनाया जा सके। बौद्ध सदस्‍य, श्रीमती स्‍पाल्‍जेस अंगमो ने भी यह मामला हाथ में लिया और बौद्धों द्वारा पवित्र मानी जाने वाली नदी रोथुंगचू पर कई पनबिजली परियोजनाएं सिक्किम में बनाये जाने के बारे में सिक्किम सरकार से बातचीत की। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार अब ये दोनों परियोजनाएं रद्द की जा चुकी हैं और तीसरी की समीक्षा की जा रही है।

आयोग ने हरियाणा के रेवाड़ी जिले में 1984 में छिल्‍लर गांव में सिखों के मारे जाने की कथित घटना का मीडिया में खबरें आने पर खुद संज्ञान लिया और घटना के शिकार लोगों के पुनर्वास के बारे में हरियाणा के मुख्‍यमंत्री से बात की। हरियाणा के मुख्‍यमंत्री ने इलाहाबाद उच्‍च न्‍यायालय के एक सेवानिवृत्‍त न्‍यायाधीश के नेतृत्‍व में पहले ही जांच आयोग नियुक्‍त कर दिया था। सिखों से संब‍ंधित अन्‍य मामले भी उठाये गए जिनमें हरियाणा में अलग से गुरूद्वारा प्रबंधक कमेटी के संविधान का मामला शामिल था। उठाये गए अन्‍य विषयों में पंजाबी को दूसरी भाषा के रूप में लागू करना और आकाशवाणी तथा दूरदर्शन केंद्र से पंजाबी कार्यक्रमों की शुरूआत शामिल है।

पारसियों की घटती जनसंख्‍या और उनकी सहायता के लिए आरक्षण जैसे मामले भी राज्‍य और केंद्र सरकारों के साथ उठाए गए। पारसी समुदाय के प्रतिनिधि ने भी इस संबंध  में वित्‍त मंत्री से बात की और उन मुश्किलों पर चर्चा की जो प्रत्‍यक्ष कर संहिता वर्तमान स्‍वरूप में लागू किए जाने पर सामने आ सकती हैं। वर्तमान वित्‍त वर्ष में फरवरी 2012 तक आयोग में कुल 20 मामलों की सुनवाई की जा चुकी है। आयोग को कुल 2336 शिकायतें मिलीं जिनमें से 588 निपटायी जा चुकी है और बाकी पर प्रक्रिया जारी है।

वर्ष के दौरान हाल की मंदी और भारतीय अर्थ-व्‍यवस्‍था में उदारीकरण का लघु, कुटीर और हस्‍तशिल्‍प उद्योगों में काम करने वालों और खासतौर से मुस्‍लिम  अल्‍पसंख्‍यक समुदाय के कामगारों पर प्रभाव और उनके उपचार संबंधी उपाय तथा अल्‍पसंख्‍यक अधिकारों के बारे में कानूनों और कानूनी नजीरों के संकलन जैसे विषयों पर दो महत्‍वपूर्ण शोध  अध्‍ययन करवाये गए।(पसूका)