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केंद्रीय वाणिज्य उद्योग एवं कपड़ा मंत्री, आनंद शर्मा ने रुस की आर्थिक विकास मंत्री ई. नबीउलीना के साथ 27 मार्च, 2012 को नई दिल्ली में विचार विमर्श किया फोटो: पसूका |
दोनों पक्षों ने व्यापार के आकार को बढा कर एक संतोषजनक स्तर पर ले जाने पर सहमति जताई। इस बात पर भी ध्यान दिया गया कि भारत और रुस के बीच द्विपक्षीय व्यापार वर्तमान व्यापारिक संभावनाओं को देखते हुए काफी कम है, इसलिए द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाने के लिए आपसी सहयोग की ज़रुरत है। प्रतिकूल व्यापार संतुलन पर भी चिंता जताई गई। बड़े पैमाने पर व्यापार में असंतुलन को देखते हुए इसे कम करने की खातिर भारत से रुस को किए जाने वाले निर्यात को बढ़ाने के साथ ही मजबूती देने की भी ज़रुरत महसूस की गई।
शर्मा ने भारतीय फार्मा कंपनी तथा रुस की फार्मा कंपनियों के बीच संयुक्त उपक्रम स्थापित करने पर जोर दिया। रुसी पक्ष 500 दवाइयों की सूची उपलब्ध कराएगा (ज्यादातर सामान्य और रणनीतिक), जिसमें से 75 प्रतिशत रुस आयात करेगा और साथ ही कुछ रणनीतिक दवाइओं के उत्पादन संबंधी सूचना की भी ज़रुरत होगी। भारत को उम्मीद है कि रुस के बड़े बाज़ार और पड़ोसी देशों जिनके रुस के साथ अनुकूल व्यापारिक रिश्ते है उसका भरपूर लाभ उसे मिलेगा। इस मुद्दे पर रुस के प्रतिनिधिमंडल में सकारात्मक रुख देखने को मिला। नबीउलीना ने कहा कि यह संभव है कि रक्षा क्षेत्र को छोड़कर आने वाले सालों में व्यापार को 1.5 गुणा बढ़ाया जा सकता है और संयुक्त उपक्रम की स्थापना एक अच्छा आइडिया है। दवा उद्योग एक अच्छा उदाहरण है, जहां हम लोग सहयोग कर सकते हैं।
शर्मा ने नबीउलीना से कहा कि वह अलसोरा कंपनी लिमिटेड (एएलआरओएसए) एवं अन्य कंपनी के बीच लंबी अवधि के आपूर्ति समझौते एवं अनुबंध को जल्दी पूरा करने पर जोर देना चाहिए। इसके साथ ही डायमंड की बिक्री के लिए एक प्रक्रिया बना कर एमएमटीसी और एचडीसीपीएल जैसी कंपनियों को मौका उपलब्ध कराना चाहिए। शर्मा ने यह भी अनुरोध किया कि गोखरन, रुसी सरकार जिसके पास बहुमूल्य धातु है की तरफ से डायमंड की बिक्री की एक व्यवस्था को संस्थागत स्वरुप दिया जाना चाहिए। रुसी मंत्री ने इस मामले को देखने का भरोसा दिया।
भारतीय पक्ष ने भारतीय चाय और भारत के जी वन असम, दार्जिलिंग और नीलगिरी चाय के महत्व को कम करके उस पर उच्च कर लगाने का मुद्दा भी उठाया।

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