गुरुवार, 22 मार्च 2012

अमेरिकी समाचार पत्रों से: अमेरिकी बलों और तालिबान अंतिम समझरके की तैयारी



अखबार कहता है कि अफ़ग़ानिस्तान पूर्वी पहाड़ी क्षेत्र जो काबुल से करीब है और पाकिस्तान पहाड़ों के भी पास है, जहां तालिबान की शरण स्थल है अब ग्यारह वर्षीय युद्ध का अंतिम मैदान कारज़ारे बनने वाला।


सलाहुद्दीन अहमद | वाशिंगटन

वाल स्ट्रीट जर्नल कहता है कि अमेरिका तालिबान के साथ वसंत में हुए मुठभेड़ की तैयारी कर रहा है। इसलिए यह लड़ाई अंतिम होगी। और इस रणनीति काबुल को बचाना है। अखबार कहता है कि अफ़ग़ानिस्तान पूर्वी पहाड़ी क्षेत्र जो काबुल से करीब है और पाकिस्तान पहाड़ों के भी पास है, जहां तालिबान की शरण स्थल है अब ग्यारह वर्षीय युद्ध का अंतिम मैदान कारज़ारे बनने वाला। जिसमें अमेरिकी सेनाएं तालिबान के खिलाफ पंक्ति आरा होनगयाोर पहाड़ों पर बर्फ पिघलने के साथ ही लड़ाई शुरू हो जाएगी।

अखबार ने वरिष्ठ अमेरिकी कमांडरों के हवाले से बताया है कि विद्रोही नोरोज़ यानी अफगान साल नौ के दौरान पूर्व में हमले शुरू करने वाले हैं। यह क्षेत्र दोनों विद्रोहियों और अफ़ग़ान सरकार के लिए महत्वपूर्ण है। नाटो कमांडर जनरल एलेन के हवाले से  खबार कहता है कि संभावित विद्रोही हमले का मुकाबला करने के लिए अमेरिका और उसके सहयोगियों ने राजधानी की रक्षा के लिए एक वर्ग वार योजना तैयार कर लिया है ताकि विद्रोहियों को हर कदम पर कड़ी प्रतिरोध का सामना करना पड़े। जनरल एलेन की कमान उस समय 23 हजार अमेरिकी सेनाओं के अलावा फ्रांस पोलैंड और अन्य सहयोगियों के 7 हजार सैनिक हैं। इस समय अफ़ग़ानिस्तान में कुल 90 हजार सैनिक हैं जिनमें से 33 हजार अक्टूबर स्वदेश जा चुके होंगे। वरिष्ठ सैन्य पद अधिकारियों का कहना है कि अगले सा लिमिटेड तक अमेरिकी सेना की चार या पांच हजार आर हु जाएगी जिनके दायित्व केवल सलाहकार प्रकार के होंगे।

शिकागो टरीब्यून में विश्व मौसम परिवर्तन पर एक लेख में प्रमुख विश्लेषक बिल प्रेस ने इस महत्वपूर्ण मसले पर अमेरिकी राजनेताओं की चुप्पी पर आश्चर्य व्यक्त किया है। वह कहते हैं कि 2006 में जब पूर्व उप राष्ट्रपति एल गोर नेतलख सच नामक अपनी दस्तावेजी फिल्म अमेरिकी जनता को ोर्तहय हैरत में डाल दिया था। ाोरमोसम परिवर्तन से विनाशकारी परिणाम के बारे में चेतावनी दी थी। तो व्हाइट हाउस और कांग्रेस से करة ारज़ को बचाने के लिए आवाज़ थी। 

बल्कि 2008 में इन बड़े मुद्दों में जोड़ा गया थाजस पर दोनों बड़ी पार्टियों के राष्ट्रपति उम्मीद वारं ने प्रण किया कि वर्ष 2050 तक कार्बन मूनाकसाेयड की गैस को 50 प्रतिशत तक कम किया जाएगा बल्कि रिपब्लिकन उम्मीद वा जॉन मैक्केन 65 प्रतिशत कमी पर जोर दिया था ाोरालमी हरारतकोमे सुरक्षा एक मसलह दिया था। लेकिन छह साल बीतने के बाद मौसम परिवर्तन कोई समस्या ही नहीं रहा। और हालात बद से बदतर हो गए हैं। गलेशईर गायब हो रहे हैं।

समुद्र तल बुलंद होती जा रही है। लेकिन पिछले चार साल के में मौसम से संबंधित एक भी गंभीर मसोदाय कानून क्लिक नहीं किया गया। राष्ट्रपति ऊर्जा और मौसम परिवर्तन के कार्यालय डयरैक्ट्र केरल बराउंर ने निराश होकर इस्तीफा दे दिया और उनकी जगह किसी और को नहीं नियुक्त किया गया।

लेखक का कहना है कि प्रशांत देश की परमाणु बाती ने एक द्वीप है अपनी पूरी आबादी यानी एक लाख तीन हजार लोगों को फिजी स्थानांतरित करने की योजना बना लिया है क्योंकि मौसम परिवर्तन की वजह से पूरा द्वीप समुद्र में डूब जाएगा  खुद अमेरिकी तट के निचले क्षेत्रों में रहने वाले 37 लाख लोगों को आने वाले दशकों के दोराँ समुद्र के लहरो  से सीलाबों का खतरा है। उधर मूनटा ना से फ्लोरिडा तक दरजहय तापमान के सैकड़ों रिकॉर्ड टूट चुके हैं। जब पूरी अमेरिकी राष्ट्र गर्म मौसम की चपेट में है। और यह सब विश्व तापमान का शाखसाना है। और समय बीतने के साथ हालात और भी खराब होंगे।

दुनिया भर में मौसम की असामान्य परिवर्तन पर डीटराईट फ्री प्रेस एक ादारेये में कहता है कि अब यह कहना मुश्किल हो गया है कि वसंत का पहला दिन जून के महीने के किसी दिन की तरह लगता है। और कैलेंडर रोसे जो सर्दियों के नाम से पहचाना जाता है। इस साल सिरे से आया ही नहीं। अखबार कहता है कि रिकॉर्ड तोड़ गर्मी के कारण मौसम में स्पष्ट परिवर्तन है। दुनिया के कुछ क्षेत्रों में बाकी जगहों की तुलना में अधिक कड़ी ठंड पड़ी। जैसे यूरोप में सर्दियों विशेष रूप से बम की सर्दी पड़ी है।

अखबार ने खुद मिशिगन राज्य में मौसम बवालिजब्यूं उदाहरण देते हुए कहा है कि दो सप्ताह पहले इस राज्य के द्वीप नुमा क्षेत्र में बर्फ का भारी हाथ तूफान आया था। लेकिन जोनही दरजहय तापमान 70 फ़ारेनहाइट पार कर गया तो यह बर्फ इसी सरित के साथ पिघल भी गई और पिछले साल इस क्षेत्र में मूसलाधार बारिश का एक नया रिकॉर्ड बनाया था जिसके लिए यह क्षेत्र तैयार ही नहीं। --- वीओअ  न्यूज़

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